देहरादून, 7 सितम्बर। हिन्दी दिवस (14 सितम्बर) के अवसर पर वैश्विक हिन्दी शोध संस्थान, देहरादून द्वारा जारी शोध रिपोर्ट 2025 ने एक नया तथ्य उजागर किया है। इस शोध के अनुसार हिन्दी भाषा विश्व में पहले स्थान पर है, जबकि प्रचलित धारणा के अनुसार अब तक हिन्दी को तीसरे स्थान पर दिखाया जाता रहा है।

संस्थान के महानिदेशक डॉ. जयंती प्रसाद नौटियाल के अनुसार, “अमेरिकी संस्था एथ्नोलोग द्वारा जारी रिपोर्टों में हिन्दी की वास्तविक स्थिति को सही ढंग से प्रस्तुत नहीं किया गया। कई बार अंग्रेज़ी और मंदारिन (चीनी) को बढ़ा-चढ़ाकर प्रस्तुत किया गया है, जबकि आंकड़ों के आधार पर हिन्दी बोलने और समझने वालों की संख्या विश्व में सर्वाधिक है।”
शोध की पृष्ठभूमि
यह शोध कार्य वर्ष 1981 से आरंभ हुआ था और 1983 में इसका प्रथम संस्करण जारी किया गया। इसके बाद से यह रिपोर्ट प्रत्येक दो वर्ष में विश्व हिन्दी दिवस (10 जनवरी) के अवसर पर अद्यतन की जाती रही है। वर्ष 2025 का संस्करण इसका बीसवाँ संस्करण है।
इस शोध को विभिन्न संस्थागत समितियों और विश्वविद्यालयों ने प्रमाणित भी किया है। उत्तराखंड भाषा संस्थान तथा कर्नाटक विश्वविद्यालय, धारवाड़ सहित कई प्रतिष्ठित संस्थाओं ने इसे प्रामाणिक शोध घोषित किया है।
एथ्नोलोग की गणना पद्धति पर प्रश्न
एथ्नोलोग अंग्रेज़ी जानने वालों की संख्या में उन लोगों को भी शामिल करता है जिन्हें केवल कामचलाऊ अंग्रेज़ी आती है। उदाहरणस्वरूप, कोई मराठी भाषी व्यक्ति यदि थोड़ी अंग्रेज़ी जानता है तो उसकी गिनती मराठी और अंग्रेज़ी दोनों में की जाती है। जबकि हिन्दी के मामले में ऐसा नहीं किया गया।
डॉ. नौटियाल का कहना है कि उर्दू जानने वालों को भी हिन्दी भाषियों में गिना जाना चाहिए, जैसा कि अंग्रेज़ी की सभी बोलियों को एक साथ गिना जाता है।
वास्तविक आँकड़े
शोध रिपोर्ट में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार :
भारत के 11 हिन्दी भाषी राज्यों/क्षेत्रों की जनसंख्या (2025) : 69 करोड़
अन्य हिन्दी जानने वाले भारतीय (ख एवं ग क्षेत्र) : 51 करोड़
विदेशों में हिन्दी जानने वाले : 14 करोड़ से अधिक
उर्दू भाषी, प्रवासी व अन्य समूह : 25 करोड़ से अधिक
कुल मिलाकर विश्व में हिन्दी बोलने और समझने वालों की संख्या 159 करोड़ से अधिक आंकी गई है। इसके विपरीत अंग्रेज़ी जानने वालों की संख्या 150 करोड़ और मंदारिन बोलने वालों की संख्या लगभग 110 करोड़ है। इस आधार पर हिन्दी विश्व की सबसे बड़ी भाषा है।
डॉ. नौटियाल का योगदान
डॉ. जयंती प्रसाद नौटियाल बहुमुखी प्रतिभा के धनी विद्वान हैं। यूनियन बैंक ऑफ इंडिया से उप महाप्रबंधक पद से सेवा निवृत्त होने के बाद वे हिन्दी शोध एवं साहित्यिक कार्यों में सक्रिय हैं।
उनकी शैक्षणिक उपलब्धियों में 82 डिग्री/डिप्लोमा, 96 पुस्तकें, 1521 लेख, 129 शोध पत्र तथा 113 रिपोर्टाज शामिल हैं। हिन्दी साहित्य और शोध कार्यों में उनके योगदान के लिए उन्हें 115 से अधिक पुरस्कार एवं सम्मान मिल चुके हैं।
निष्कर्ष
इस शोध से यह तथ्य सामने आता है कि हिन्दी केवल भारत की नहीं बल्कि विश्व की सबसे बड़ी भाषा है। हिन्दी दिवस के अवसर पर यह उपलब्धि न केवल हिन्दी प्रेमियों के लिए गौरव की बात है बल्कि भारतीय सांस्कृतिक पहचान को भी सशक्त बनाती है।