
देहरादून, 28 जुलाई 2025 – देहरादून के राजपुर रोड स्थित होटल मधुबन में आयोजित पत्रकार वार्ता में खानपुर विधायक उमेश कुमार ने उत्तराखंड में सामने आए 200 करोड़ रुपये के मनी लॉन्ड्रिंग मामले को लेकर प्रदेश सरकार और पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि यदि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सरकार इस प्रकरण में आरोपियों को बचाने का प्रयास करती है, तो वे इस मामले को लेकर उच्च न्यायालय जाएंगे और इसकी जांच ईडी या सीबीआई से कराने की मांग करेंगे।
पूर्व सीएम के सलाहकार की पत्नी रही कंपनी में डायरेक्टर
विधायक उमेश कुमार ने खुलासा किया कि “सोशल म्यूचुअल बेनिफिट निधि लिमिटेड” नामक कंपनी, जो देहरादून-हरिद्वार बाईपास स्थित ब्राह्मणवाला में स्थित है, में 2017 से 2020 तक पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के औद्योगिक सलाहकार केएस पंवार की पत्नी डायरेक्टर थीं। वर्तमान में भी उनके रिश्तेदार इस कंपनी में निदेशक पद पर बने हुए हैं।
इस कंपनी पर आरोप है कि इसने 2017 से 2020 तक करीब 50,000 फर्जी एफडी और आरडी खातों के माध्यम से 200 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध रकम को वैध रूप में बदलने की कोशिश की। जांच में सामने आया कि जिन नामों पर ये एफडी बनाई गईं, उनमें से कई लोग या तो मृतक हैं या 5-6 साल के बच्चे हैं, जिनके नाम का दुरुपयोग किया गया। कई खाता धारकों को तो यह भी जानकारी नहीं थी कि उनके नाम पर खाते खोले गए हैं।
जांच की प्रक्रिया और साक्ष्यों से छेड़छाड़ के आरोप
विधायक उमेश कुमार ने बताया कि उनकी शिकायत पर शासन ने कंपनी की गतिविधियों की जांच आर्थिक अपराध शाखा (EOW) को सौंपी। आरबीआई ने भी मुख्य सचिव को पत्र लिखकर कंपनी की धोखाधड़ी की जांच कराने की मांग की थी। इसके बाद शासन ने एसटीएफ का गठन किया, लेकिन इसके कुछ समय बाद ही कंपनी की फाइलें और आवश्यक साक्ष्य गायब कर दिए गए।
उन्होंने आरोप लगाया कि ईओडब्ल्यू की जांच को दबाने का प्रयास किया जा रहा है और खाता धारकों से जबरन कबूलनामा लिया जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि निष्पक्ष जांच न हुई तो वह कानूनी लड़ाई लड़ेंगे।
LUCC चिटफंड घोटाले की भी सीबीआई जांच की मांग
विधायक उमेश कुमार ने LUCC (The Loni Urban Multi State Credit & Thrift Co-operative Society) द्वारा किए गए चिटफंड घोटाले को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने इसे प्रदेश का अब तक का सबसे बड़ा वित्तीय घोटाला करार दिया।
2017 में शुरू हुई इस कंपनी ने गढ़वाल, श्रीनगर को अपना केंद्र बनाकर लोगों को पैसा दोगुना करने और बैंक से अधिक ब्याज देने का लालच देकर करोड़ों रुपये इकट्ठा किए। 1 जून 2024 को पहली बार इस घोटाले का पर्दाफाश हुआ, जब कोटद्वार निवासी एक युवती ने कंपनी की दुग्गड़ शाखा के मैनेजर और कैशियर पर धोखाधड़ी का आरोप लगाया।
पुलिस ने अब तक कंपनी से जुड़े आठ अभियुक्तों को गिरफ्तार किया है, जिनमें स्टेट हेड भी शामिल है। साथ ही मुख्य साजिशकर्ता समीर अग्रवाल (CMD, मुंबई), बड़ा सेठी (फंड मैनेजर, मुंबई), उत्तम सिंह राजपूत (बाराबंकी, यूपी), और शबाब हुसैन के खिलाफ लुक आउट नोटिस जारी किया गया है।
विधायक ने की केंद्रीय एजेंसियों से जांच की मांग
विधायक उमेश कुमार ने मांग की कि दोनों मामलों की जांच निष्पक्ष तरीके से सीबीआई या ईडी जैसी केंद्रीय एजेंसियों से कराई जाए। उन्होंने राज्य सरकार को आगाह करते हुए कहा कि यदि आरोपियों को बचाने की कोशिश की गई, तो वे सड़कों से लेकर न्यायालय तक संघर्ष करेंगे।