देहरादून, 8 अप्रैल 2026।
जिले में कथित भूमि घोटाले को लेकर माहौल गर्मा गया है। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (CPI-M) ने भूमाफियाओं और पुलिस की मिलीभगत का आरोप लगाते हुए जिला मुख्यालय पर जोरदार प्रदर्शन किया। पार्टी का दावा है कि गोल्डन फॉरेस्ट की जमीन को फर्जी बैनामों के जरिए हड़पने और एनएच-72 मुआवजा घोटाले में बड़ा खेल हुआ है, जिसमें राजनीतिक संरक्षण भी शामिल है।
प्रदर्शनकारियों के अनुसार, वर्ष 2021 में एनएच-72 के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू होते ही भूमाफियाओं ने फर्जी दस्तावेज तैयार कर खसरा नंबर 641 और 637 की जमीनों पर कब्जे की साजिश रची। आरोप है कि गोल्डन फॉरेस्ट से जुड़ी इन जमीनों को कूटरचित बैनामों के जरिए बार-बार खरीदा-बेचा दिखाकर मुआवजा हड़पने की कोशिश की गई।
फर्जी बैनामों का जाल उजागर
शिकायत में कई वर्षों के बैनामों की कड़ी जोड़ते हुए दावा किया गया है कि 1996 में ही यह जमीन डिस्टि प्रॉपर्टी प्रा. लि. के नाम दर्ज हो चुकी थी, जो गोल्डन फॉरेस्ट से संबंधित है। इसके बावजूद बाद के वर्षों में अलग-अलग व्यक्तियों के नाम पर फर्जी तरीके से खरीद-फरोख्त दिखाकर दस्तावेज तैयार किए गए।
आरोप है कि इस पूरे नेटवर्क में जैन एंड कंपनी और उससे जुड़े लोगों ने संगठित गिरोह बनाकर काम किया, जिन पर पहले से भी जमीन हड़पने और धोखाधड़ी के मुकदमे दर्ज हैं।
आंदोलनकारियों पर ही दर्ज हो रहे मुकदमे
CPI(M) नेताओं का कहना है कि मामले को उजागर करने के बजाय पुलिस उल्टा आंदोलन का नेतृत्व कर रहे पार्टी कार्यकर्ताओं पर ही 2022 से लगातार मुकदमे दर्ज कर रही है। इसे उन्होंने भूमाफिया–पुलिस गठजोड़ का सबूत बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है।
प्रशासन ने दिया आश्वासन
प्रदर्शन के दौरान जिलाधिकारी की ओर से उपजिलाधिकारी कुमकुम जोशी ने ज्ञापन लिया और प्रदर्शनकारियों की बात सुनी। उन्होंने 14 अप्रैल के बाद जिलाधिकारी स्तर पर वार्ता कराने का आश्वासन दिया।
क्या हैं मुख्य मांगें?
गोल्डन फॉरेस्ट से जुड़ी सभी संदिग्ध बैनामों की निरस्तीकरण
कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर जमीन कब्जाने वालों पर सख्त कार्रवाई
एनएच-72 मुआवजा घोटाले की निष्पक्ष जांच
प्रभावित काश्तकारों को सुरक्षा और न्याय
झूठे मुकदमों को वापस लेने की मांग
प्रदर्शन को पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं ने संबोधित किया और चेतावनी दी कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
